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अरे तिवारी जी, तुम तो बहुत दर... निकले

: पहले तो सफाई-कर्मचारियों के हक पर डाका डाला, फिर नेतागिरी : ड्यूटी से नदारत थे, कामचोरी में पकड़े गये तिवारी जी मुअत्‍तल : तिवारियों की फितरत कमाल की है, चाहे वह एनडी हो, बकरदाढ़ी हो, या फिर रसीले होंठों वाला, शातिराना अंदाज मारक होता है :

कुमार सौवीर

लखनऊ : तिवारी जी कमाल के निकले। बिलकुल दर... टाइप। कामधाम नहीं करते हैं, नेतागिरी बहुत ज्‍यादा। रंगबाजी से फ्री में खींच रहे थे सरकार नौकरी की बंधी-बंधायी तनख्‍वाह। लेकिन आखिरकार दबोचे गये। फिलहाल तो प्रशासन ने उनका सस्‍पेंड कर दिया है। जांच बैठा दी गयी है अलग से।

तिवारियों को आज हम बेवजह गाली नहीं दे रहे हैं। नेतागिरी में लगे तिवारियों वाले अधिकांश नेताओं की फितरत ही ऐसी होती है। झूठ, दलाली, मक्‍कारी ऐसे लोगों की नस-नस में भरी होती है। चाहे वह नेताओं में एनडी तिवारी हों, पत्रकारिता में बकरदाढ़ी हों, जौनपुर वाले रसीले होंठ वाले शिक्षक-पलट-पत्रकार-धंधेबाज हों, या फिर गोंडा के बंजरवा गांव में तैनात राघवेंद्र तिवारी। सब के सब बिलकुल दर-टाइप हैं। किसी की भी दुम उठाओ, बिलकुल वही निकलेंगे।

ताजा मामला है गोंडा का। यहां के बेलसर क्षेत्र में दो गांव हैं। एक है बंजरवा और दूसरा है खमरौनी। इन गांवों में सफाई कर्मचारी के तौर पर सवर्ण की तैनाती हो गयी थी। इनमें से बंजरवा गांव में साफ-सफाई का काम करने के लिए राघवेंद्र तिवारी जी की ड्यूटी थी। लेकिन चूंकि राघवेंद्र जी जाति के पण्डित थे, इसलिए समस्‍या यह थी कि वह कैसे मैला उठाते, कैसे साफ-सफाई करते, कैसे शौचालयों को घिसते। खमरौनी की भी यही हालत थी।

ऐसे में राघवेंद्र तिवारी जी ने अपनी पण्डित बुद्धि लगायी, और अपना सरकारी पद के काम से गैरहाजिर होकर नेतागिरी करने लगे। उन्‍होंने अपने साथियों के साथ मिल कर अपना ही एक नया अलग संगठन खड़ा कर दिया। संगठन का नाम रखा:- उप्र पंचायत राज सफाईकर्मचारी संघ। अब चूंकि यह संघ उनकी निजी जागीर थी, इसलिए तिवारी जी ने संघ में महामंत्री का पद खुद ही झटक लिया। कई कर्मचारी नेताओं ने उन्‍हें बता दिया था कि नेतागिरी मस्‍त काम है, और इसमें जुटे कर्मचारी नेता को काम से छूट मिलती है। इसलिए तिवारी ने दांव खेल दिया। लेकिन उन्‍हें यह नहीं पता था कि जेबी संगठन के नेताओं को यह सुविधा नहीं मिलती है।

उधर इन गांवों में गंदगी का अम्‍बार लग गया। सरकारी स्‍कूल बुरी तरह गंधाने लगे, झाडि़यां उग गयीं। शौचालय बेमतलब साबित हो गये। जब यह हालत देखी, तो गांव वालों ने शिकायत कर दी। लेकिन राघवेंद्र तिवारी के कान पर जूं भी नहीं रेंगी। ऐसे में शिकायत मण्‍डलायुक्‍त से हुई, तो उन्‍होंने उप निदेशक स्‍तर के एक अधिकारी से जांच कराने का आदेश किया। जांच में पता चला कि तिवारी समेत तीन सफाई कर्मचा‍री लम्‍बे समय से गैरहाजिर हैं।

नतीजा यह हुआ कि इन तीनों को प्रशासन ने मुअत्‍तल कर दिया है।

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