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काला दिन: प्रेस-क्‍लब में पुलिस, सामाजिक कार्यकर्ता बंदी, पत्रकार नेता दड़बे में

: दलितों के मसले पर रमेश दीक्षित, आरएस दारापुरी समेत कई कार्यकर्ता पुलिस कस्‍टडी में : एक सुर से निन्‍दा हो रही है पुलिस की ऐसी हरकत पर : अत्यंत घृणित अलोकतांत्रिक कदम : छापा पड़े तो दल्ला भागता है :

मेरी बिटिया डॉट कॉम संवाददाता

लखनऊ : पूरे 28 साल बाद यूपी प्रेस क्‍लब परिसर में पुलिस ने एक बड़ी हिमाकत कर डाली। बिना किसी सूचना के पुलिस परिसर में घुसी और वहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे बड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर अपने साथ ले गयी। यह लोग झांसी में पकड़े गये दलितों को लेकर पत्रकारों को जानकारियां देने के लिए यहां आये थे। इस प्रेस कांफ्रेंस के लिए इन कार्यकर्ताओं ने पहले ही सूचना भी दे रखी थी। पुलिस हिरासत में ले गये इन लोगों में एनसीपी के वरिष्‍ठ नेता डा रमेश दीक्षित, पूर्व आईजी आरएस दारापुरी आदि प्रमुख हैं। पुलिस की इस हिमाकत पर पूरा मीडिया जगत बौखला गया है, हर ओर निंदा और भर्त्‍सना की जा रही है।

लेकिन हैरत की बात है कि किसी भी वरिष्‍ठ पत्रकार या किसी पत्रकार नेता ने इस पुलिस कार्रवाई पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है। पत्रकार नावेद शिकोह ने लिखा है कि :- छापा पड़े तो दल्ला भागता है। कबुतर हमले के वक्त आँख मूंदता है। पत्रकार ना चरित्रहीन है ना बेबस। फिर खामोश क्यो? स्वामी नवेदानंद। जबकि अधिवक्‍ता, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता संजीव पाठक ने इस हादसे को आपातकाल के तौर पर पहचाना है। उन्‍होंने लिखा है कि यह आपातकाल है। संजीव पाठक ने इस गिरफ्तारी की फोटो भी जारी की है।

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पत्रकार

पत्रकार शबाहत विजेता ने लिखा है कि उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब में आज पुलिस घुस गई वह भी एक इतने बड़े पूर्व पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार करने के लिए की जब कुर्सी पर थे तब पुलिस कप्तान की भी उनसे नज़रें मिलाने की हिम्मत नही होती थी। इस पूर्व पुलिस अधिकारी एस आर दारापुरी की बस इतनी गलती है कि उन्होंने प्रचंड बहुमत की सरकार के सामने मानवाधिकार का सवाल उठा दिया इतने प्रचंड बहुमत की सरकार क्या प्रेस के सामने सवाल उठाने वाले कि ज़बान काटने पर आमादा है या फिर इतना डरी हुई है कि किसी को सच बोलने की छूट नही दे सकती।

प्रो, रमेश दीक्षित जो विद्यार्थियों को शिक्षा देने का काम करते रहे, आशीष अवस्थी जो लेखक है, एक्टिविस्ट है, पत्रकार है, इस आर दारापुरी जो सामाजिक चिंतस्क हैं, दलित सवाल उठाते रहे हैं, ईमानदार पुलिस अफसर रहे हैं, इस तरह के लोगों को पुलिस के कुछ दरोगा और सिपाही प्रेस क्लब जैसी जगह से उठा ले जाएंगे। क्या अघोषित इमरजेंसी लग गई है। क्या बोलने की आज़ादी छिन चुकी है। क्या सिर्फ जी हुजूरी वाले ही ज़िंदा रहेंगे।। यह सिर्फ शुरुआत है। इस सरकार ने प्रेस क्लब पर धावा बोलकर यह टेस्ट किया है कि प्रेस में कुछ सांसे बची हैं या फिर वह मुर्दा हो चुकी है।

वर्चस्व की जंग लड़ने वाले ठेकेदार किस बिल में छिपे हैं। यह सबके सोचने का समय है। यह हमला प्रेस क्लब की प्रतिष्ठा पर हमला है। ठेकेदार सोते रहे तो वह दिन दूर नही जब अखबार के दफ्तरों और चैनलों में पुलिस घुसेगी। आई बी एन सेवन चैनल में यह तांडव हो ही चुका है। दस्तक खुद सरकार ने दी है। आज उनके साथ हुआ है कल हमारे साथ होगा। आज दारापुरी और रमेश दीक्षित आतंकियों की तरह उठाये गए हैं काल हम उठाये जाएंगे। हमे शर्म आनी चाहिए कि 5 साल की अस्थाई नौकरी पर आए लोग हमारेव स्थाई प्रतिष्ठा से खेल रहे हैं।

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प्रेस-क्‍लब

d Kazmi बहुत ही ग़लत हुआ है यह

Ravish Zaidi Shameful shame shame yogi and modi

Vimal Saxena Hindu सहारनपुर हिंसा को लेकर सतर्क सरकार का ये कदम सराहनीय है..और दीक्षित जी राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। सच को सच के आईने से देखिए..झूठ का मुल्लमा मत चढाईये..आपको शोभा नहीं देता

Pranjali Thakur Sir hume b bada tajjub hua............ye sochniy hai ki kya sarkaar itna dari hui hai .........kyu????? Aur kisi ne kuch b nahi kaha .........press club kya abb bus ek prisar bn gaya hai ....mere zahan me aaj b press club ki bachpan ki tasveer hai .......kaha gaye vo log?????

Pranjali Thakur Mujhe thori ashanka tab ho rahi thi jab kendra aur pradesh sarkaar ....sirf sarkaari media ko hi baat ka madhyam bana rahi thi......lekin ye nahi bhulna chahiye yaha loktantra hai.......aise kadam parajay aur astitv khatm karne ki oor badhenge ....hum bahut mazbut loktantra hain

Kamal Tiwari Polish ke kratya ki kade shabdon mai ninda

Asp Abbas Very bad

Khan Shaheryar Vijeta sahab you are correct

Shikoh Azad Jo hua woh galat hai....jo ab ho raha woh usse bhi galat..hai..sabko sath aaker 1 awaaz mein ninda karni chahiye....

Jyoti Kiran Ratan It's so bad.

Rajveer Ratan Singh GALAT HAI IS

Wasi S. Rizvi Shameful, waise in logo se aur koi tawaqqo bhi nahi honi chahye.

Amir Sabri शबाहत भाई ने ठीक कहा कि ये टेस्ट है अगर इसी तरह प्रेस के लोग खामोश बैठे रहे और दलाल मीडिया की तरफ देखते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब एक एक कर उन पत्रकारों जिन में लिखने या बोलने का सहस है फ़र्ज़ी मुक़दमों में फंसा कर जेल भेज दिया जाएगा और दलाल क़िस्म के पत्रकार सिर्फ हंसी उड़ाएंगे जो आज हुआ घोर निंदनीय और घृत है इसकी जितनी भी निंदा की जाए काम है योगी सरकार सब को रिहा करे और इस पर माफ़ी मांगे

Utkarsh Sinha खुद के घर शीशे के हों वो दूसरे पर पत्थर क्या फेंकेगा।

आज जो शर्मनाक हरकत कभी गौरवशाली इतिहास रखने वाली संस्था यूपी प्रेस क्लब में हुई और जिस तरह की कायराना हरकत वहाँ के ओहदेदारों ने उसने लोकतंत्र की अहद उठाने वाले जम्हूरियत के चौथे खंभे के मुंह पर कालि...See more

Shahkar Zaidi ये दबदबा यह हुकूमत ये नशा-ए-दौलत

किरायेदार हैं यह घर बदलते रहते हैं

अखिलेश चन्द्रा Shameful

Naved Shikoh छापा पड़े तो दल्ला भागता है। कबुतर हमले के वक्त आँख मूंदता है। पत्रकार ना चरित्रहीन है ना बेबस। फिर खामोश क्यो? स्वामी नवेदानंद

Anshu Awasthi Shame Modi bjp government

Atul Awasthi What rubbish

Sartaj Beg अकलमन्द आदमी की खोपड़ी में चावल पका कर खाने से ज्ञान आता है तेलिया मसान -- जय खप्पर वाले बाबा की

Siddharth Priya Srivastava LOKTANTRA ki LATHI m bahut takat hoti hai yogiji

Deepak Bajpai आपातकाल या तानाशाही

Chaturved Arvind निंदनीय.

Comments (3)Add Comment
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written by अभिषेक शुक्ला, July 08, 2017
यह घटना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है और आने वाले समय में पत्रकारों की अस्मत से सरकार के हाथों खेला जाना निश्चित है। जब समाज में भ्रष्ट नेताओं को बोलने की स्वतंत्र रूप से आजादी मिली हुई है तो एक सामाजिक कार्यकर्ता को क्यों नहीं इन विषम परिस्थितियों में सभी पत्रकार भाइयों को और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सरकार के खिलाफ एक जंग छेड़नी चाहिए मैं अभिषेक शुक्ला संपादक वूमेन टाइम्स न्यूज़ ऑनलाइन यह शपथ लेता हूं इस मुद्दे पर सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं वह पत्रकार भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलूंगा मेरा संपर्क नंबर 9415 17 47 32 ,89 539 11777 है
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written by yogesh singh, July 04, 2017
Sir, its a trial from our government. The next target is our offices and house. Until its too late We have to raise the voice against this brutal activity.
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written by Prashant Saahil Mishra, July 04, 2017
लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ की अस्मिता का हनन। कलम की आज़ादी खत्म ? या निष्पक्षता को खत्म कर चाटुकारिता को बढ़ावा देने का प्रयत्न ? योगीराज में इस प्रकार की घटना वास्तव में निंदनीय है, यदि इस पर पत्रकार समाज चुप रहा तो वो समय किचिंत मात्र भी दूर नहीं जब प्रेस और मीडिया चैनलों के ऑफिसों तक पुलिस और प्रशासन तो दूर, अपराधी और भ्रष्टाचार के हितैषी तक उनके विरोध पर घुस आएंगे, और बलवा करेंगे।
इस कृत्य पर आवश्यक कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।

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