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सिपाही से लेकर कप्‍तान तक की खबर छापिये, पैसा उगाहिये

: चुनाव की आंधी चल रही है, नेता, दारोगा, कोटेदार वगैरह से विज्ञापन मिलेंगे : सब्‍जबाग इतने, जिन्‍हें देख कर तो किसी अच्‍छे-खासे आदमी का दिमाग सटक जाए :

कुमार सौवीर

लखनऊ : इस दोहा नामक इस युवती ने कई दौर की फोन बातचीत में बताया कि आज के दौर में पत्रकारिता ही इकलौता ऐसा धंधा है जिसमें सबसे ज्‍यादा गुंजाइशें हैं। न हींग न फिटकरी, रंग चोखा। पत्रकार बनने के बाद आपको समाज में भरपूर सम्‍मान मिलेगा। मसलन नेता। आजकल तो चुनाव का धंधा चौकस है, इसलिए नेता लोग लपक कर विज्ञापन पर पैसा फूंकने निकलेंगे। आप उन्‍हें फौरन लपक लीजिए। उसने बताया कि जो लोग विधायक बनना चाहते हों, उनकी खबर लिखिये। उनका बताइये कि केवल आपके लिखने से ही वह नेता चुनाव जीत कर विधायक बन सकता है। सिपाही और कोटेदार जैसे सरकारी लोग और अफसर लोग अब पत्रकारों से भय खाते हैं। खबर छपी नहीं, कि हंगामा खड़ा हो जाता है।

पत्रकारिता में कमाई भी खूब है। खबर की खबर छापिये, और साथ में विज्ञापन भी जुटाइये। उनके बारे में छापिये और पैसा कमाइये। आसपास के लोगों से आपको आसानी से विज्ञापन मिल  जाएंगे। दारोगा से, कोटेदार से, लेखपाल से, बीडीओ से, एसपी से, डीएम से, इन से, उन से। जो भी मिले, विज्ञापन लीजिए और उसकी फीस वसूलिये। आप जो भी फीस वसूलें, उसका 40 फीसदी तो अपने पास रखिये। बाकी 60 फीसदी रकम हेड आफिस में जमा कीजिए। सब मिल-जुल कर ही काम करेंगे, तब ही तो फलेंगे-फूलेंगे।

फोन नम्‍बर 7800008067 से बोल रही इस युवती ने अपना नाम दोहा बताया। किसी कुशल व्‍यवसायी की सेल्‍सगर्ल की तरह इस युवती ने मुझे समझाया कि आज के दौर में डिग्री-सार्टिफिकेट अब मूंगफली के दोने बनाने के काम आते हैं। कमाने के लिए अक्‍ल की जरूरत होती है। उसने मुझे समझाया कि मुझे अक्‍ल का इस्‍तेमाल करना सीखना चाहिए और इस तरह ही मैं अपना जीवन सफल कर पाऊंगा। ठीक-ठाक काम करूंगा और बेहिसाब कमाऊंगा। हर तरफ मेरी चर्चा होगी, तारीफ होगी, मेरा सम्‍मान होगा और महफिलों में मेरी पूछ होगी। इस युवती ने मुझे इतने सब्‍जगाह दिखा दिये, जिसे सुन कर तो एक औसत आदमी हमेशा सब्‍जबागों की ही सैर करता रहता।

दोहा नामक इस युवती ने मुझे बताया कि:- आप पत्रकार बनना चाहते हों तो फौरन सीधे लखनऊ के निराला नगर में बने सी-चैनल के हेड-ऑफिस में आइये और अपना अपाइंटमेंट लेटर वगैरह ले जाइये। फौरन, वरना फिर आपके इलाके की यह पत्रकारिता की यह सीट कोई किसी दूसरे को मिल जाएगी। मैंने सी-न्‍यूज का ठीक-ठाक पता समझने के लिए पूछा तो उसने बताया कि निराला नगर में युवा भारत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड का ऑफिस है। डॉ असलम का नाम पूछ लीजिए। पूरा पता है डीए-20, निराला नगर। आठ नम्‍बर चौराहे और रामकृष्‍ण मठ के पास। आईटी चौराहे के आगे। कई बार इस युवती ने मुझसे फोन करके जानना चाहा कि मैं कब लखनऊ आ रहा हूं। मैंने आज-कल का बहाना बनाते हुए कई दौर में उससे बातचीत की। उसका कहना था कि अगर पता पूछने में दिक्‍कत हो तो मैं निरालानगर पहुंच कर फोन कर लूं।

तीसरे दिन इस युवती ने कहा कि अगर लखनऊ आने में आप फौरन इच्‍छुक न हों, तो बैंक में सी-चैनल के एकाउंट में फीस जमा की जा सकती है। फीस जमा होते ही अपाइंटमेंट लेटर वगैरह रवाना कर दिया जाएगा। उसने बताया कि सी-चैनल का खाता दो बैंकों में है। एक तो एसबीआई में और दूसरा पीएनबी में। स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया में 33101820786 नम्‍बर का खाता है, और पंजाब नेशनल बैंक में युवा फाउंटेशन के नाम पर सी न्‍यूज का खाता है। खाता नम्‍बर है 6910002100000386 पीएनबी। (क्रमश:)

पत्रकारिता के नाम पर बाजार में लहालोट धंधा चल रहा है। इसके पहले भी खुद को न्‍यूज चैनल के तौर पर दिखाने-बताने वालों ने प्रति विधानसभा दस हजार रूपया महीना पर रिपोर्टरों की नियुक्ति कर रखी है। हैरत की बात है कि यह धंधेबाजों में ऐसे भी लोग शामिल हैं, जो किसी न किसी बड़े चैनल में बड़़े ओहदों पर रह चुके हैं। लेकिन किसी न किसी घोटालों-किस्‍सों-बवालों में लिप्‍त होने का खुलासा होने के बाद उन्‍हें अपनी नौकरी गंवानी पड़ चुकी है। ऐसे में अब यह लोग ऐसे धंधे में शरीक हो गये हैं। ऐसी दूकानों को पहचानने के लिए कृपया निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए:-

यह सम्‍पादक तो अपने ही चैनल को चूना लगा गया !

"रूक तेरी मां का ---" बाप रे बाप ! यह चैनली पत्रकारों की भाषा है ?

"तू दलाल, दुष्‍चरित्र"... "और तू तो बीवी और साली से अनैतिक धंधा कराता है"

मैं तो हमीरपुर में अवैध खनन की फोटो खींच कर वसूली करता था। तुम भी कमाओ, मुझे भी खिलाओ

कमाल की धंधाबाजी की पत्रकारिता कर रहे हैं वाट्सापिये पत्रकार

बड़ी दारोगा को लेडी सिंघम साबित किया पत्रकारों ने, तो वा‍ट्सापियों ने सत्‍यानाश

पुराना बड़ा दारोगा था "कभी खुशी कभी गम", नयी वाली "लेडी-सिंघम"

अभी तो दारोगाओं को चाबुक लगवाया है, फिर ऐड़ मरवाया जाएगा, फिर न जाने क्‍या-क्‍या होगा, हाय अल्‍ला

"गंदी बात" वाले "चावला-चिकन" अपना नहीं, दूसरे संस्‍थान को ढाई करोड़ की रकम दिला गये। कमीशन पर

बिखरने लगा नेशनल वायस न्‍यूज चैनल का घोंसला, तीन-तलाकों की भारी भीड़

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