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और लीजिए जनाब, हो गया तलाक !

तीन बार तलाक बोल दिया तो बीबी हरामः देवबंद

फोन मिलाइये तलाक बोलिये। बस काम खत्म
बीबी सुने या ना सुने, तलाक बोला है तो हो गया
दारूल उलूम ने दे दी फोन पर भी तलाक देने की व्यवस्था
देवबंद के फतवे के बाद फिर मचा हडकम्पए विरोध के स्वर उठे

खासकर ऐसे दौर में जबकि पुरूषों द्वारा गुस्से में तलाक देने को लेकर खडे हुए विवादों का समाधान खोजने की कोशिशें तेजी पर चल रही हैंए सहारनपुर स्थित देवबंद दारूल उलूम ने फोन पर तलाक को जायज ठहराने का फतवा जारी कर एक नया विवाद खडा कर दिया है। देवबंद ने अपने फतवे में कहा है कि फोन पर दिया गया तलाक भी जायज होगा। हालांकि इस प्रमुख स्लामिक शिक्षा केंद्र ने इस बारे में कोई भी टिप्पणी नहीं की कि अगर यह तलाक गुस्से में दिया गया तो भी क्या इसे जायज ही माना जाएगाघ् बहरहाल देवबंद के इस फतवे को लेकर विवाद खडा हो गया है। हालांकि मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने अभी तक इस मसले पर कोई भ्ज्ञी टिप्पणी नहीं की है।
देवबंद दारुल उलूम देवबंद ने कहा है कि मोबाइल फोन पर बातचीत के दौरान बीवी को शौहर द्बारा तीन बार तलाक कहे जाने की बात सुनाई नहीं देने पर भी तलाक मुकम्मल माना जाएगा। दारुल उलूम के दारुल इफ्ता विभाग ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर शौहर ने किसी गवाह के मौजूद नहीं होने पर भी मोबाइल फोन पर अपनी बीवी से बातचीत में तीन बार तलाक कह दिया तो उसे तलाक माना जाएगा। भले ही सिग्नल में दिक्कत या किसी अन्य कारण से बीवी ने तलाक की बात नहीं सुनी हो।
सवाल करने वाले व्यक्ति ने पूछा था कि उसने एक बार गुस्से में अपनी बीवी को तीन बार तलाक बोल दिया था। लेकिन उसकी बीवी वह बात नहीं सुन सकी थी, तो क्या इसे तलाक माना जाएगा। इस पर दारुल इफ्ता ने फतवे में कहा, अगर आपने अपनी बीवी से तीन बार तलाक कहा है तो उसे तलाक माना जाएगा। और अब आपकी बीवी आपके लिए हराम हो गई है। फतवे में कहा गया है कि इस मामले में तलाक मुकम्मल होने के लिए यह जरूरी नहीं है कि बीवी ने तलाक की बात सुनी हो या फिर उस बात के गवाह मौजूद हों।

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