Meri Bitiya

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मेरी लाड़ली मैनें बुने हैं सपने तेरे लिए

मेरी लाड़ली


मैनें बुने हैं सपने तेरे लिए
अपनी बदरंग ज़िंदगी में
खिले एक सतरंगे इंद्रधनुष से.
तेरी कमान भौहों में
तेरी चकित आंखों में
पाता हूं वही सपना.....
शोर भरी उदास गलियों से
मैं ढ़ूढ़ लाता हूं
चिड़ियों की चहचहाहट
किसी उनींदे बरगद पर
गूंजते कलरव में
पाता हूं तेरी किलकारियां
सुबह की शोख किरणों में
खिलती तेरी खिलखिलाहट
मेरी थकी हारी शिराओं में
दौड़ जाती है,
हर नई सुबह, नई कोशिश की जुंबिश ले कर
मैं खपा देता हूं खुद को
कंकरीट के जंगल में
इस्पाती बौनों के बीच
खोजने के लिए
तेरे लिए एक कोना... महफूज़..
तरानों के किनारे
सपनीला घरौंदा..।
अपने खून की हर बूंद
पसीने और आंसुओं से
चिपचिपाए चेहरे से
चुका देना चाहता हूं
हर वह कीमत प्यार की
जब तेरे कपोलों से
लाज की लाली
कोई प्यारा सा सूरज
उधार लेगा.....।
वजह यही है कि
मैं सिर्फ कल्पना में देख पाता हूं
तेरा थिरकते हुए चलना
तेरी करधनी के घुंघरुओं का मचलना
तेरी तुतलाहट भरी बोली....
सिर्फ इसी आस में
कि उठा सकूं मैं अपने बेदम कंधों से
तेरी फूल सी डोली......

-अंशुमान त्रिपाठी

 

 

 

Comments (2)Add Comment
...
written by BHAVANA TIWARI, April 19, 2013
WAAH WAAH ...KYA KHOOBSOORAT RACHNAA HAI ..........MAN BHAVUK HO AAYAA .............BAHUT BAHUT BADHAI ..RACHNAKAR KO ....
...
written by deepika, February 14, 2013
very nice sir....बहुत प्यारी पोइम है...

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