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वकील: जेठानी न खुद धोएंगी, न देवरानी को धोने देंगी

: इलाहाबाद में सरेआम कत्‍ल किये गये वकील राजेश श्रीवास्‍तव को लेकर वकीलों में असंतोष चरम पर : एक वकील ने खुला विरोध-पत्र इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को भेजा : बार अध्‍यक्ष ने कहा कि कुछ वकीलों का पत्र मिला है, उस पर रणनीति होगी :

मेरी बिटिया संवाददाता

इलाहाबाद : एक अधिवक्‍ता की सरेआम हुई हत्‍या को लेकर अब वकीलों का गुस्‍सा लगातार भड़कता ही जा रहा है। निशाने पर हैं पुलिस और प्रशासन के अफसरों के साथ ही साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसियेशन के अध्‍यक्ष इंद्रकुार चतुर्वेदी। हालत यह है कि बार के लोगों ने चतुर्वेदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि राजेश श्रीवास्‍तव की हत्‍या के मामले को चतुर्वेदी जी दबा रहे हैं, जबकि बार को चाहिए था कि वे इस मामले पर निर्णायक लड़ाई छेड़ते। पत्र में लिखा गया है कि अगर कोई प्रभावी रणनीति तैयार नहीं की गयी तो शक है कि हमने अपना नेतृत्व एक बहुत ही कमजोर व्यक्ति के हाथ मे सौप दिया है।

उधर बार एसोसियेशन के अध्‍यक्ष आईके चतुर्वेदी का दावा है कि किसी भी बार की अपनी सीमाएं होती हैं, और उसी के हिसाब से ही कोई भी एसोसियेशन किसी घटना पर अपनी रणनीति तैयार करती है। मेर‍ी बिटिया संवाददाता से बातचीत में चतुर्वेदी का कहना था कि कुछ वकीलों ने इस मामले पर एक पत्र बार को भेजा है, जिस पर जल्‍दी ही विचार करने के लिए बैठक आयोजित की जाएगी, और उसके बाद ही बार अपना स्‍टैंड क्लियर करेगा।

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लर्नेड वकील साहब

क्षुब्‍ध वकीलों की ओर से बार के अध्‍यक्ष चतुर्वेदी जी को एक अधिवक्ता शरदेन्दु कुमार पाण्डेय जी ने एक पत्र भेजा है, इस पत्र में पाण्‍डेय ने लिखा है कि आपने कहा कि स्व_राजेश_श्रीवास्तव के हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए रितीश श्रीवास्‍तव का प्रोटेस्ट उनका इंडिविजुअल ऐक्ट है, लेकिन यह कैसे उनका इंडिविजुअल ऐक्ट है....?? आप हमारे चुने प्रतिनिधि है और एशिया के सबसे बड़े बार के अध्यक्ष है और आपका एक अधिवक्ता भाई मारा गया है। इस पर तो आपको स्वयं स्टैंड लेना चाहिए और आप चुप है। क्या ये शर्मनाक स्थिति नही है..??

पांडेय ने लिखा है कि जहाँ आपको खड़ा होना चाहिए वहाँ मात्र दो चार वन्दे खड़े होकर प्रोटेस्ट कर रहे है। ईश्वर न करे आपके साथ कोई घटना घटे अन्यथा आपके कातिल भी मज़े से घूमेंगे और एक मात्र ऋतेश एंड उनकी टीम कातिलों को पकड़ने के लिए प्रोटेस्ट करेगी। बाकी आप ही की तरह एचसीबीए तमाशा देखेगी। पांडेय ने लिखा है कि इन हालातों में चतुर्वेदी जी विचार करे और आंदोलन को नेतृत्व प्रदान करे और कातिलों को जेल पहुँचाने का काम करे। अन्यथा मुझे लगेगा कि मैंने अपना नेतृत्व एक बहुत ही कमजोर व्यक्ति के हाथ मे सौप दिया है....सोचे सर.....।।

बड़ी बिडम्बना है कि यह दम्भ भरा जाता है कि हम एशिया के सबसे बड़े बार एसोशिएशन है और एक स्ट्रांग अधिवक्ता एकता का नारा बुलंद किया जाता है उसके बावजूद भी अधिवक्ता गाजर मूली की तरह काटा जाता है और हम सबसे बड़े बार वाले तमाशा देखते है और कातिल मौज करते है......अत्यंत दुःखद और हास्यास्पद स्थिति है दुनिया के सबसे बड़े बार की....और इसका एकमात्र कारण है बार की गुटबाजी और अहंकार

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जस्टिस और न्‍यायपालिका

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