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लोअर कोर्ट बुलशिट, हाईकोर्ट जाऊंगा। बोला बड़ा पत्रकार

: इंडिया टीवी वाले रजत शर्मा ने खंखार के थूका और हाईकोर्ट से स्टे ले आए : जब ऊंचे रिश्‍ते हैं, मीडिया की हनक है, और पैसे की कमी नहीं, तो फिर कोई बकलोल  ही होगा जो लोअर कोर्ट की गली में खड़ा हो : सीजेएम ने जारी किया था रजत शर्मा आदि पर एनबीडब्‍ल्‍यू का वारंट :

कुमार सौवीर

लखनऊ : फर्जी खबर फैलाने के आरोप में सीजेएम की अदालत में चल रहे एक मुकदमे पर हाईकोर्ट ने इंडिया टीवी न्‍यूज चैनल के मुखिया रजत शर्मा के सारे कष्‍टों का हरण कर उनकी लाइन-क्लियर कर दी है। उनकी ओर से हाईकोर्ट के वकील प्रशांत चंद्रा नेे हाजिरी लगायी और झट से रिलीफ मिल गयी। ठीक उसी तरह, जैसे अपने कष्‍ट के समय में श्रीराम का बेड़ा पार कर दिया था महाबीर हनुमान ने। खैर, अब रजत शर्मा को निचली अदालत में सीजेएम कोर्ट में नहीं खड़ा होना पड़ेगा।

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लर्नेड वकील साहब

आपको बता दें कि इंडिया टीवी समेत देश के विभिन्‍न हिन्‍दी-अंग्रेजी के अखबारों, चैनलों और वेब-पोर्टलों ने एक खबर चलायी थी। लेकिन इस खबर पर ऐतराज़ करते हुए लखनऊ में जिला जज रह चुके राजेंद्र सिंह ने उसे फर्जी और अपमानजनक बताया था। उन्होंने इंडिया टीवी और रजत शर्मा समेत तकरीबन 15 समाचार संस्थानों पर नोटिस भेजी और कहा कि उन द्वारा प्रकाशित-प्रसारित की गई बातें पूरी तरह निराधार है अतः यदि वह तत्काल उस फर्जी बातों का अविलम्‍ब खंडन नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ अदालत में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। यह अपराध का मुकदमा होगा।

जैसे कि उम्मीद ही थी कि दो समाचार संस्थानों ने क्षमा याचना तो कर ली लेकिन बाकी अपने पत्रकारीय अहंकार के एवरेस्ट पर चढ़े रहे। उन्‍होंने यह भी जानने-समझने की कोशिश नहीं की कि उन्होंने कितना बड़ा अपराध कर दिया। एक ऐसा अपराध जो एक समाचार संस्थान जैसा बड़ा समूह होने के चलते जन-आस्था और विश्‍वास पर बेहद मेहनत के साथ तामीर किया जाता है। लेकिन इस तथ्‍य को इन सभी समाचार संस्थानों ने बकवास मानते हुए इस नोटिस को कूड़ेदान में फेंक दिया।

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पत्रकार पत्रकारिता

नोटिसों का जवाब न मिलने पर राजेंद्र सिंह ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लखनऊ की अदालत में इन सब को अभियुक्त बनाते हुए मुकदमा दायर कर दिया। मगर इसके बावजूद इन बड़े हेकड़ीबाज पत्रकारों ने नोटिसों का कोई भी जवाब देने के बजाय कोर्ट के सम्‍मनों-वारंटों को भी कूड़ेदान में फेंक दिया। कई बार ऐसा हुआ। वारंट जारी हुए लेकिन पेशी पर कोई हाजिर नहीं हुआ।आखिरकार अदालत ने नियमानुसार कार्रवाई शुरू की और इन सभी अभियुक्तों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। आदेश दिया गया किन सभी अभियुक्तों को तत्काल अदालत में पेश किया जाए।

लेकिन इसके बावजूद इन पत्रकारों ने अपना हेकड़ी का भाव बनाए रखा और मुख्य नायक दंडाधिकारी की अदालत में खुद होने के बजाय वे सीधे हाईकोर्ट पहुंच गए। इसके लिए इंडिया टीवी ने अपने मामले पर अदालती कार्रवाई पर स्‍टे कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में कार्यरत प्रशांत भूषण जैसे दिग्गज वकील की सेवाएं लीं।

खबर है कि 16 मई को लखनऊ हाई कोर्ट में प्रशांत चंद्रा ने इस मामले की सुनवाई की और जज जस्टिस महेंद्र दयाल ने इस मामले पर रजत शर्मा पर जारी गैर जमानती वारंट वाली कार्यवाही पर स्‍टे कर दिया। इसके साथ ही साथ इंडिया इंडिया टाइम्स ऑफ इंडिया आदि पर सीजेएम द्वारा जारी की गई कार्यवाही पर भी स्थगन आदेश जारी कर दिया है।

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जस्टिस और न्‍यायपालिका


Comments (2)Add Comment
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written by R P Singh, May 18, 2018
पीत पत्रकारिता का दौर चरम पर है,बड़े पत्रकार और मीडिया हाउस पीत पत्रकारिता और ब्लैकमेलिंग के पुरोधा बने हुये हैं
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written by Azeem Mirza, May 18, 2018
जिसकी लाठी उसकी भैस कहावत चरितार्थ हो गई।

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