Meri Bitiya

Tuesday, Sep 17th

Last update02:57:01 PM GMT

मेरी बिटिया डॉट कॉम अगर आपको पसंद हो, आप इस पोर्टल के लिए सुझाव, समाचार, निर्देश, शिकायत वगैरह भेजने के इच्‍छुक हों तो meribitiyakhabar@gmail.com पर हम आपकी प्रतीक्षा कर रहे है.

Advertisement

"हाईकोर्ट में तो अब बेशर्म गर्भवती औरतें ही दिखेंगी"

:गर्भवती महिला अधिकारी हाईकोर्ट में दिखी, तो पढ़े-लिखे दिमाग नंगे हो गये : पर्सनल एपीयरेंस पर कोर्ट आयी थी यह महिला अफसर :  एक महिला वकील ने मसला उठाया तो पूरा थुक्‍का-फजीहत शुरू: लोअर कोर्ट के बाद अब हाईकोर्ट के वकीलों के रवैये भी आलोचना के केंद्र में आये :

कुमार सौवीर

लखनऊ : यह न्‍याय-परिसर हैं। इनका क्‍या गुणगान क्‍या किया जाए, इसके लिए शब्‍द तक नहीं मिल पा रहे हैं। लेकिन इतना समझ लीजिए आप साहबान, कि कई बरसों-दशकों से लखनऊ के अधीनस्‍थ अदालतों में अक्‍सर हंगामा होता रहता है। कारण बनते हैं वकील, जो कभी-कभार आक्रोशित हो जाते हैं। कभी अनायास, तो कभी सायास। किसी बात पर हंगामा खड़ा हो जाता है, कभी किसी को पीट दिया जाता है, तो कभी न्‍याय-परिसरों में गालियों का सुभाषितानि की स्‍वर-लहरियां गूंजती ही रहती हैं। आपको याद होगा कि अभी करीब दो बरस पहले एक पूर्व सांसद को लोअर कोर्ट के वकीलों ने पूरे परिसर ही नहीं, बल्कि मुख्‍यमार्ग पर भी दौड़ा-दौड़ा कर पीटा था और उसके सारे कपड़े ही फाड़ डाले थे। हालत यह थी कि बनवारी लाल कंछल नामक इस पूर्व सांसद तथा व्‍यापारी नेता के गुप्‍तांगों तक से खून टपकने लगा था। एक मामले में तो एक मामले की सुनवाई के दौरान लोअर कोर्ट के वकीलों ने आपस में जमकर मारपीट कर डाली थी।

खैर, यह सब तो लोअर कोर्ट में अक्‍सर तो होता ही रहता है। जनता इन वकीलों की ऐसी करतूतों को लेकर अक्‍सर ऐसे छोटे वकीलों पर लानत भेजती ही रहती है। लेकिन अब आपकी पेश-ए-खिदमत में हाजिर है हाईकोर्ट में बिचरते वकीलों की करतूतें। कोई तीन दिन पहले हुए एक हादसे में एक गर्भवती प्रशासनिक अधिकारी को देख कर एक वकील साहब अपना संयम नहीं सम्‍भाल पाये, और उस महिला अफसर को लेकर वकीलों में अपनी चुटीली शैली में चिकोटी काट खाये। इस हादसे को यूं ही लोग ऐसे ही मिट्टी डाल कर बात आयी-गयी बताने पर आमादा थे, लेकिन अम्बिका त्रिपाठी नामक एक साहसी वकील ने ऐसे वकीलों को बेपर्दा कर दिया। इसके बाद तो इस हादसे का संज्ञान अवध बार एसोसियेशन के पूर्व महासचिव आरडी शाही ने अपनी वाल पर प्रकाशित कर दिया, तो यह पढ़ कर लोगों को ही नहीं, बल्कि पूरे न्‍याय जगत में हंगामा मच गया।

अधिवक्‍ता-जगत से जुड़ी खबरों को देखने के लिए कृपया निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिए:-

लर्नेड वकील साहब

दरअसल, काले कोट का अर्थ यह कैसे हो सकता है, कि जहां ऐसे काले कोटधारी लोग मौजूद होंगे वहां न्‍याय और कानून का राज होगा। वहां शांति होगी, अमन होगा, व्‍यवस्‍था होगी, एक सलीका होता, तरीका होगा और माहौल खुशनुमा तो होगा ही, साथ ही अदालत परिसरों या उसके आसपास वकीलों की बातचीत भी संयत और सुरूचिपूर्ण होगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। क्‍या हुआ, इस को समझने के लिए अम्बिका त्रिपाठी नामक इस महिला अधिवक्‍ता के फेसबुक वाल पर जाना पडे़गा। अम्बिका ने लिखा था कि:- यह घटना कोई दो दिन पहले की है। लेकिन मैं उसको आज शेयर करने जा रही हूं। भारी ऊहापोह भी थी, इसीलिए अब तक यही सोच रही थी कि इसे शेयर करूं भी या नहीं। लेकिन अब आज मैंने जी कड़ा किया और यह घटना का ब्‍योरा आपके सामने करने जा रही हूं।

वैसे हाईकोर्ट में तरह के कमेंट शायद महिलाओं के लिए कोई नये नहीं हैं। लेकिन ऊपर वाले की कृपा से मेरे सामने ऐसा दूसरी बार हुआ है।

यह घटना नवनिर्मित उच्‍चन्‍यायालय भवन के दो नम्‍बर की कोर्ट के पास हुई थी। दरअसल उस वक्‍त किसी मुकदमे को लेकर एक किसी महिला अधिकारी की व्‍यक्तिगत पेशी यानी पर्सनल एपीयरेंस होने वाली थी। वह महिला अधिकारी गर्भवती थी।

लेकिन हैरत की बात यह हुई कि उस महिला अधिकारी को देख कर हमारे बीच के एक सम्‍भ्रान्‍त या ज्ञानी-पढ़ेलिखे वकील साहब अपना संयम नहीं संजो पाये और अचानक ही उनके मुंह से यह शब्‍द निकल ही पड़े:- " या अल्‍लाह। अब जब पैडमैन जैसी फिल्‍में आ गयी हैं तो अब गर्भवती होने की हालत में औरतें आ ही जाएंगी। शर्म की बात तो अब रह नहीं गयी है ..."

बाद में उस गर्भवती महिला अधिकारी पर ऐसी बेहूदगी वाला कमेंट करने वाले वकील साहब की खोजबीन और पहचान की कवायद का सिलसिला शुरू हो गया। पहचान-परेड की कार्रवाई में पता चला तो लोग हैरत में आ गये। पता चला कि उस वकील साहब का नाम है जीएम कामिल।

इसके बावजूद कि इस घटना में सीधे-सीधे तौर पर मैं पीडि़त नहीं थी। लेकिन मुझे उन विद्वान अधिवक्‍ता की यह बेहूदगी बेइम्तिहाई नागवार गुजरी। और मैंने अपना विरोध तत्‍काल कड़े शब्‍दों में उसी समय दर्ज करा दिया।

उसको यहां लिखने की जरूरत नहीं है। लेकिन क्‍या महिलाओं से जुड़े ऐसे सम्‍वेदनशील मुद्दों पर मजाक उड़ाया जा सकता है, मेरी असल चिंता का विषय तो यही रहा था, और आज भी है। और यह तब और भी ज्‍यादा गम्‍भीर मामला हो जाता है कि जब यह बेहूदगी हम वकीलों के द्वारा की जा रही हो, जो कि अपने तर्कों से समाज को नयी सोच और नई दिशा देते हैं, लोगो को राय-सलाह देते हैं, लोगों को सार्थक दिशा देने के अपने दायित्‍वों का निर्वहन करते रहते हैं।  कहने की जरूरत नहीं कि हम वकीलों पर भी यह दायित्‍व है कि वे समाज और देश को और अधिक प्रगतिशील बनाने की उत्‍तरदायित्‍व का बोध समझें। यह इसलिए जरूरी है, ताकि हम वकील समुदाय समाज-देश में रूढि़वादी परम्‍पराओं को समाप्‍त करने का सतत अभियान चलाते ही रखें।

क्‍या ऐसा नहीं है?

न्‍यायपालिका की खबरों को पढ़ने के लिए कृपया निम्‍न लिंक पर क्लिक कीजिएगा:-

जस्टिस और न्‍यायपालिका

आइये, हम आपको पढ़ाते हैं कि अम्बिका त्रिपाठी की इस पीड़ा का खुलासा उनकी वाल पर होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं क्‍या रहीं:-

Vasu Viraj Thakur : Aise logo k soch k liye kahi kahi na kahi gandi rajniti bhi jimmedar he

Parul Shailesh Awasthi : They represent their family di...They deserve a........Okay di

Shailja Pandey : Ye samaj par dhabba.......

Sudhir Singh Raghuvanshi : बहुत ही गलीज़ सोच का जानवर,,,,,,

Meena Singh Kathayat : Ye gandi mansikta chalti aa rahi hai lekin iska muh tod jawab humein shabdo main dene ki zaroorat nahi ye unhe bhi pata hai hum ladies kahi kisi field main puruson se kam nahi bas thoda pareshan honge wo shayad ghar pe bhi inki begum inse do haath aage hongi isliye frustration kaha nikale that's why court room choose kiya unhone

Rushida Farheen : बहुत ही गलत बात ..... court में बैठे बैठे ये लोग टोंट मारते रहते हैं ...

Divya Nikunj Gupta : Ham ladies to pregnency me b ghar,bahar or apne kaam/vakalat b kr lete hai..in jaise mardo ko sirf jabaan hilana aata hai...kahi aourto ke jindgi ek din k liye b mil jaye to jabaan chalane se tauba kr lenge.

Samiksha Verma : Extremely shameful to heard this incident but at not surprised because we all had faced these kind of incidents in high court, it great to see that you have the courage to name and shame these kind of lawyers

Shweta Asthana : Very shameful ..but Di.. aapne uska naam share kark bahut accha kiya...ab ye post usko padhani chahiye...

Ruby Singh : JYadatr budhijeevi log hi ssbse bade roodhivadi hote hai

Anshu Pandey : ghatiya log ghatiya dimag .unse puchti apni paidais m ku nhi sharminda hoty

Saima Khan : Motherhood is the glorious life force.Why a lady should feel ashamed during pregnancy Mr.Kamil.

Mamta Rai Sharma : Mr. कामिल..... Sharm आनी चाहिए आपको........ आप इस दुनिया में pregnancy के through ही आए हैं...... शायद आपको इस दुनिया में लाना aapki माँ की सबसे बड़ी गलती है......

Rupa Shukla : Very shameful Mr. Kamil bcoz ap asmaan se ni tapke hai.

Shweta Bajpai Shukla : Ur reaction was relly appreciable....n you know ambu periods...pregnancy breast feeding these r still supposed to be d matter of shame.....d que.is why?n how long will be we backward...bt i hope d change ll sure come with our efforts....

Poonam Gupta : Ishwar agle janam me unhe ek aurat he banaye tab unhe ehsaas hoga ki ladies ki life kitni tough hoti hai

Swapnil Mishra : Dear ye comments sirf high court ki baat hi nahi ye .actually we are Indians.

Anshu Singh : Jo khud ka nahi dekh pate vo dusre me jada intrested hote hi... Pregnancy koi galt hi kya ..? Vo bhi aise he is duniya me aaye hi.. This is natural...Is pr logo ko garv hona chahiye ...Ki aise bhi breve log hi ..Ki apna kaam karte hi...Or aise bekuf bolne waale har jagh hote hi...

Manjusha Kapil : Ye to bhut chhoti baat Hai kmskm un mahila ka character nhi naapa. yahan to court me kisi bhi lady advocate ke liye kuch bhi annap shnaap bkna to chalan me Hai. kisi ko khne me kafi log nhi chookte ki mahila bhut kharab ya characterless Hai pr ye nhi b...See more

Ambuj Kumar Singh : इस तरह की गन्दी टिप्पणी करने वाले लोग सम्पूर्ण नारी समाज के साथ-साथ अपनी जननी का भी अपमान करते है ,मैं एैसे घृणित चरित्र वाले पुरुष के इस कृत्य की निन्दा करता हूँ.

Jain Nupur Poddar : Mai jyada to nhi bolungi ....lekin ye soch parivar aur mata pita ki hi den h....hum apni betiyon ke sath sath beton ko sanskar sikhye...pahli galti pr hi kaan ke neeche ek kheech kr de...to shayad hi kuch sudhar ho ...log bade garv se kahte h ye to kadka h...kuch bhi kare...behtar hoga hum apne Ghar see hi suru kare...

Jain Nupur Poddar : Kyuki aapas me ek dusre ko neecha dikha KR kuch saabit nhi hoga...wo aap ko kahenge aur aap unko ...aur ye silsila you hi chalta rhega .

Shilpi Gupta : I request Mr. counsel who have said this statement. Kindly see your wife, mother and sister before saying anything. She might be victim of this type of situation or more than this some where else. Try to protect them by changing your conduct. Else being an advocate you understand my concern.

Ankita Singh : Sick mentality

Deepti Gupta : Very shameful Mr. Kamil...

Ambica Tripathi : Guys ....It is requested to all of u plz share this post from your wall...so that , the post may reach to that fellow .

Mamta Saxena : Very shameful

Kshama Awasthi : Very shameful.. Ye soch ka farakh hai

Dhirendra Sahai : Shameful comment.

Amit Tripathi : 'Bessram' aur Be-haya log h ye......

Adv Shantanu Shukla : अम्बिका जी, आपसे निवेदन है कि इस घटना को हिंदी में लिखकर पोस्ट करिये।

विनम्र निवेदन

Poonam Narayan : Har saal Women's Day manane se Kya faayda. Jab womens ki respect hi nhi.

नीरज सिंह राठौर : Need no comments like this... Motherhood is boon of God.

Rakesh Pratap Singh : I salute you for this daring deed.

Arun Singh Shameful..........Advocate? Shame....

Jai Ram Rai : Aase long on ko jabab milna chahiye.I appreciate You for raising this issue.

Saurabh Kumar Srivastava : Extremely Shameful and Misogynistic

A very large breed Alas

Atulesh Singh : Conduct and words of advocate is highly deplorable and unacceptable objectionable too deserve to be condemned

Siddharth Singh : If anyone has seen this movie padman.... And understands that why this movie is important...shall not raise such controversial argument with any of the fine lady...as it relates to our family members too....similarly that person also definietly donot understand the concept of such movie being relased accross the world...so it won't be necessary on the another hand to make such people understand it's importance as it would be total waste of time....smile will be the best answer in such situation...

Gaurav Mishra : निकाल के जुटे या चप्पल से ऐसे लोगो का स्वागत करना चाहिये। फिर बात करनी चाहिए।

Mohit Dwivedi : Ambika you raised the voice for her that is applaudable and you did not hesitate to mention the name that gives credit to your voice.

I am feeling ashamed and sorry for such conduct.

Motherhood is respected in every society, the world over . this revered status can only be enjoyed by women.

Kailash Nath Tiwari : REGRETTED

KP Singh : Improper comment by a learned Advocate.

Shravan Verma Adv : सराहनीय कदम,

वैसे हम युवा अधिवक्ताओं द्वारा सीनियर्स के ऐसे कार्यों का विरोध करना भी सीनियर्स के प्रति अपमान उनके द्वारा माना जाता है।

सादर नमन आपको व आपकी हिम्मत को।

Adv Satish : पता नहीं क्यों कभी कभी ये लगता है कि हम अब भी मूलतः पाशविक ही हैं।केवल civilized होने का दिखावा ही करते है। Women empowerment की डिंगो के बीच यशोधरा का कंटेंट भी साथ साथ ही चल रहा है-अबला जीवन हाय तुमहारी यही कहानी आँचल में है दूध और आँखों में पानी।

Prabhakar Tripathi : न जारजातस्य ललाट श्रंगं कुल प्रसूतस्य न पाणि पद्मं ।

यथा यथा मुंचति वाग्जालं तथा तथा चास्य कुलप्रमाणमं ॥

Shiivaani Kulshresthhaa : कल महिला सशक्तिकरण दिवस हैं। अब अवध बार, बार एसोसिएशन, बार काउन्सिल ऑफ उत्तर प्रदेश, बार काउंसिल ऑफ इंडिया खुद इस बारे में सोचे कि महिलाओं के लिए कोर्ट कचहरी का माहौल कैसा हैं। पता नही यह वकील साहब कैसे पैदा हुए। अपनी उत्पत्ति पर प्रश्न चिह्न लगा रहे ...See more

Satyendra Nath Srivastava : हर रूप में मां,

बहन, बेटी, पत्नी, सखा, प्रेमिका, शिक्षिका और कई-कई रूप,

नारी जो स्वच्छ बहता पानी है,

जो हर रूप में, हर स्थिति में ढल जाती है,

जिसके बिना जीवन अधूरा है, प्यासा है,

नारी जिससे यह सृष्टि तृप्त होती है,

जो जीवन आधार है,

संसार में भगवान का भेजा हुआ साक्षात रूप है नारी,

प्रकृति का दूजा नाम जिसे देवों ने भी सर्वस्व स्थान दिया है,

शक्ति का मान, नारी क्यों आज तरसे है अपने ही सम्मान को?

Jitendra Pratap Singh : बात बात पर पुलिस की बखिया उधेड़ने वाले,उन बेगैरत वकील साहब की तारीफ में एक शब्द नहीं बोले आज भाई जी !

Ravi Shankar Pandey : I am unable to write any thing.because it's denote that the person concern is incomplete man.

कान्हा श्रीवास्तव : We lawyers Image transforming from protector of society to the devil of society. We should think about it. Defend criminals but don't adopt criminals mentality .

Dileep Kumar Srivastava Shameful, Motherhood is respected in every society.

Anand Pratap Singh : दकियानूसी सोच

Ambica Tripathi : Thanks to all of u for support and your respect for ladies .....and specially shahi sir , for his concern that he share my post ,

Arjun Singh Kalhans : इस घटना से यही लगता है मनुष्य केवल नारी सम्मान का दिखावा करता है । मौका मिलते ही अपनी विद्रूपता वाली सोच को तुरंत प्रदर्शित करने में देर नही लगाता।

Comments (1)Add Comment
...
written by Hari Om Rana , March 08, 2018
Very shameful conduct by lawyer I strongly condem it..

Write comment

busy